एक बकोटा माटी लेहनी
यूपी आ बिहार से |
दोसर बकोटा माटी लेहनी
आन्हकेहु के दुवार से |
कि हमर माटी - हरदम गाभिन ;
आन्ह के माटी- कबो गाभिन ; कबो बिसुकल !
तबो आन्हकेहु काँहे हरखित ;
आ हम हर दफे काँहे बिसूरत ?
-करवईया बिनु !
माटी के कोड़वईया बिनु ,
हरनधी करवईया बिनु,
मड़ई के छ्वइया बिनु,
जंगली घास गर्हवईया बिनु ,
(सबसे आगे ;सबसे बढ़के )
-गीत नया लिखवइया बिनु ,
सोहर के गवईया बिनु ,
सीख नया सिखवइया बिनु ,
आगे बढ़ के लड़वइया बिनु ,
(कँहा बा लोग उ लोग ,होs ?केने बा लोग उ लोग? )
-खेत कोड़त बा , हर जोतत बा
मड़ई छावत बा गीत गावत बा; आन्हे के
खूब लड़त बा ,खूब पढ़त बा
चमचागिरी में नाम करत बा
बाकिर सगरो कुल्हि आन्हे के
(आपन काम फलाने के)
तब काs सींकहर टाँगे के?
लमहर-लमहर मुंह बावे के
बड़हन धोंधा बान्हे के|
यूपी आ बिहार से |
दोसर बकोटा माटी लेहनी
आन्हकेहु के दुवार से |
कि हमर माटी - हरदम गाभिन ;
आन्ह के माटी- कबो गाभिन ; कबो बिसुकल !
तबो आन्हकेहु काँहे हरखित ;
आ हम हर दफे काँहे बिसूरत ?
-करवईया बिनु !
माटी के कोड़वईया बिनु ,
हरनधी करवईया बिनु,
मड़ई के छ्वइया बिनु,
जंगली घास गर्हवईया बिनु ,
(सबसे आगे ;सबसे बढ़के )
-गीत नया लिखवइया बिनु ,
सोहर के गवईया बिनु ,
सीख नया सिखवइया बिनु ,
आगे बढ़ के लड़वइया बिनु ,
(कँहा बा लोग उ लोग ,होs ?केने बा लोग उ लोग? )
-खेत कोड़त बा , हर जोतत बा
मड़ई छावत बा गीत गावत बा; आन्हे के
खूब लड़त बा ,खूब पढ़त बा
चमचागिरी में नाम करत बा
बाकिर सगरो कुल्हि आन्हे के
(आपन काम फलाने के)
तब काs सींकहर टाँगे के?
लमहर-लमहर मुंह बावे के
बड़हन धोंधा बान्हे के|
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें