बड़बड़ाने की आदत है न ....इसलिए

रविवार, 15 जून 2014

पत्नी के प्रति

पत्नी के प्रति

तुमको जब भी चुनने का संकट आये 
ध्यान रहे, मै मात्र विकल्प नहीं हूँ !
मै जो हूँ ,जैसा हूँ ,जितना भी हूँ ,
प्रथम नहीं अंत भी नहीं---
बहुत अधिक या अल्प नहीं हूँ !
सबसे ऊपर, सर्वोपरि या उससे भी ऊपर कुछ हो 
मै उसका स्वाभाविक दावेदार हूँ ; द्वंद्व नहीं हूँ !
तुझपर मेरे अधिकार क्षेत्र का निर्णयकर्ता 
मै ईश्वर से भी ज्यादा स्वछन्द कहीं हूँ !

तुम हो मेरे होने की बस एक वज़ह 
तेरे बस होने से ही कुछ हो भी पाता है !
जो करता हूँ जो धरता हूँ जो हाड़ तोड़ कर लड़ता हूँ 
सबका निमित्त सर्वस्व तुम्ही और श्रेय तुम्हे ही जाता है !
अंतर क्या तेरे मेरे में जब अंतर्मन है एकरूप 
जो भी कहता हूँ मै मुख से, तेरा मन ही उसे सुझाता है ! 
जीवन - धन- मन - तन हो तुम मेरे 
स्वीकार तुम्हारा ही मुझको जग में पहचान दिलाता है !

गाँव का खत

गाँव का खत 


मेरे गाँव ने फिर मुझको खत भेजा है , बुलाया है !
बाट जोहती राह थक गयी
पगडण्डी की कमर टूट गयी
पुलिया नाले को अब क्या जोड़े
उसकी अपनी पीठ दरक गयी

आओ पैरों से पीठ दबा दो ----
ऐसा खत में लिखवाया है !
मेरे गाँव ने फिर मुझको खत भेजा है , बुलाया है !

बँसवारी से कोयल कूके
फुलवारी में कुत्ते भूंके
घर की छत पर कौआ आकर
कब आओगे --ऐसा पूछे

अबके तो निश्चय ही आओगे
ऐसा सबने माना है !
मेरे गाँव ने फिर मुझको खत भेजा है , बुलाया है !

ईंख के रस का स्वाद बदल गया
घूरे का जलना अब कम गया
मिसरी आम का पेड़ पुराना
पिछले साल चुपचाप गुजर गया

परिवर्तन ही नियति है जग का
जड़ता तो मात्र छलावा है !
मेरे गाँव ने फिर मुझको खत भेजा है , बुलाया है !

खेल खेल के साथी सारे
सबने मिल कर गांव बिसारे
बूढ़े जिनसे हम लड़ते थे
एक एक कर स्वर्ग सिधारे

चला चली की बेला मिल लो
खत में ऐसा कहलाया है!
मेरे गाँव ने फिर मुझको खत भेजा है , बुलाया है !

आप भाड़ में जाएँ !

आप भाड़ में जाएँ !

-----इस कविता का किसी वास्तविक घटना या व्यक्ति से कोई सीधा सम्बन्ध नहीं है . सभी पात्र काल्पनिक है . और किसी का दिल दुखने का मेरा इरादा नहीं है. मैं खुद दुखी दिल से लिख रहा हूँ !

आप इस इतवार को मदर डे मनाएं
अगले इतवार को स्टेप मदर डे मनाएं
फिर किसी इतवार को ही फादर डे मनाएं
लॉजिकली अगले इतवार को स्टेप फादर डे मनाएं
उस दिन पैरंट्स को फोन कर आप लोरी सुनाएँ
दिखावे के लिए फेसबुक पर कमेंट टीप आएं
(हर्रा लगे न फिटकरी रंग चोखा आये )
आपके इसी चलन पर आपकी बीबी गौर फरमाये
साल में एक दिन हस्बैंड डे मनाये
उसके बाद एक्स हस्बैंड डे मनाये
फिर पहला दूसरा तीसरा चौथा
पांचवा छठा आदि बॉयफ्रेंड डे मनाये
(मज़ा आ जाये !)
तो जनाब मैं बिहारी ही अच्छा हूँ
आप भांड में जाएँ !
हमें तो आज भी फादर के नाम से डर लगता है
कलेजा उनका ना दुखे कही ये डर लगता है
बहुत रो रोकर तकलीफ से छिलवाई थी मूंछे
कि उनका मानना है - बेमोछ का आदमी टूअर लगता है

मेरी माँ और मेरे भाई और बहन छोटी
इनके लये कोई स्पेशल दिन नहीं होता
मेरे हर काम का आगाज़ उनके बिन नहीं होता
बहन के मैरिज के लिए पैसे
मैं भी बचाता हूँ भाई भी बचाता है
मैं भी वही खाता हूँ जो कि मेरा भाई खाता है
नहीं करता हूँ कोई काम जो सबको नापसंद आये
मैं बिहारी ही अच्छा हूँ जनाब
आप भांड में जाएँ !