आप भाड़ में जाएँ !
-----इस कविता का किसी वास्तविक घटना या व्यक्ति से कोई सीधा सम्बन्ध नहीं है . सभी पात्र काल्पनिक है . और किसी का दिल दुखने का मेरा इरादा नहीं है. मैं खुद दुखी दिल से लिख रहा हूँ !आप इस इतवार को मदर डे मनाएं
अगले इतवार को स्टेप मदर डे मनाएं
फिर किसी इतवार को ही फादर डे मनाएं
लॉजिकली अगले इतवार को स्टेप फादर डे मनाएं
उस दिन पैरंट्स को फोन कर आप लोरी सुनाएँ
दिखावे के लिए फेसबुक पर कमेंट टीप आएं
(हर्रा लगे न फिटकरी रंग चोखा आये )
आपके इसी चलन पर आपकी बीबी गौर फरमाये
साल में एक दिन हस्बैंड डे मनाये
उसके बाद एक्स हस्बैंड डे मनाये
फिर पहला दूसरा तीसरा चौथा
पांचवा छठा आदि बॉयफ्रेंड डे मनाये
(मज़ा आ जाये !)
तो जनाब मैं बिहारी ही अच्छा हूँ
आप भांड में जाएँ !
हमें तो आज भी फादर के नाम से डर लगता है
कलेजा उनका ना दुखे कही ये डर लगता है
बहुत रो रोकर तकलीफ से छिलवाई थी मूंछे
कि उनका मानना है - बेमोछ का आदमी टूअर लगता है
मेरी माँ और मेरे भाई और बहन छोटी
इनके लये कोई स्पेशल दिन नहीं होता
मेरे हर काम का आगाज़ उनके बिन नहीं होता
बहन के मैरिज के लिए पैसे
मैं भी बचाता हूँ भाई भी बचाता है
मैं भी वही खाता हूँ जो कि मेरा भाई खाता है
नहीं करता हूँ कोई काम जो सबको नापसंद आये
मैं बिहारी ही अच्छा हूँ जनाब
आप भांड में जाएँ !
इनके लये कोई स्पेशल दिन नहीं होता
मेरे हर काम का आगाज़ उनके बिन नहीं होता
बहन के मैरिज के लिए पैसे
मैं भी बचाता हूँ भाई भी बचाता है
मैं भी वही खाता हूँ जो कि मेरा भाई खाता है
नहीं करता हूँ कोई काम जो सबको नापसंद आये
मैं बिहारी ही अच्छा हूँ जनाब
आप भांड में जाएँ !
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