बरखा रानी
बरखा करिहैं |
खड़ा फसल के
खेत उपटिहैं |
उफर परिेहैं ;
असगुन उचरिहैं|
ना चरिहैं त
मरुस्थल में |
ना पर्वत के
आँगन में |
ना सूखल झरही
के जल में |
ना आग जरत
दहकत वन में |
ना भर हीक
पियासल के मन में |
अपने मन में
ई अगरइहैं |
कबो अइहैं ;
कबो ना अईंहैं |
अपने कुल-भतार के खईहैं |
रांड होइ
पायल झमकइहें |
अपने नांव
कुलबोरनी धरइहैं |
तब बरखा रानी
काहें कहइन्हें |
बरखा रानी !
बरखा करिहैं |
खड़ा फसल के
खेत उपटिहैं |
उफर परिेहैं ;
असगुन उचरिहैं|
ना चरिहैं त
मरुस्थल में |
ना पर्वत के
आँगन में |
ना सूखल झरही
के जल में |
ना आग जरत
दहकत वन में |
ना भर हीक
पियासल के मन में |
अपने मन में
ई अगरइहैं |
कबो अइहैं ;
कबो ना अईंहैं |
अपने कुल-भतार के खईहैं |
रांड होइ
पायल झमकइहें |
अपने नांव
कुलबोरनी धरइहैं |
तब बरखा रानी
काहें कहइन्हें |
बरखा रानी !