बड़बड़ाने की आदत है न ....इसलिए

गुरुवार, 16 अप्रैल 2015

 अलस्सुबह जब तुम नहाकर केश को फटकारती हो
बून्द मेरे तन - बदन को झकझोर कर यह पूछतें हैं
आज भी बरसात है क्या ? आज भी बरसात है क्या?
और तुम परदे हटाकर गीत कोई टेरती हो
कूकती कोयल अचानक आके मुझसे पूछती है
आज भी मधुमास है क्या ? आज भी मधुमास है क्या ?
फूल की खुशबू हवाओं में बिखर कर घूमती है
बोल पूजा के तुम्हारे , आके मुझसे पूछतें है
आज उत्सव खास है क्या ? आज उत्सव खास है क्या ?
दूर रहने पर भी तुम्हारे स्पर्श की अनुभूति होना
और पुलकित मन का मेरे से उलट कर पूछना यह
आज तुम उदास हो क्या ? आज तुम उदास हो क्या ?

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