बड़बड़ाने की आदत है न ....इसलिए

गुरुवार, 16 अप्रैल 2015

बहुते नीक लागे तोरा मुंह से गारी रे , गुजरिया !
देखते रहि गईनी होठवा के लाली रे , गुजरिया !
देखते रहि गईनी होठवा के लाली रे , गुजरिया !
कबो भनभनालु , कबो जोर से कढावेलु
गारी भले कहs बाकिर गीत नियर गावेलु
सुरताल में सधल बाs , हो ओ ओ ओsss
सुरताल में सधल बा तोर गारी रे , गुजरिया !
देखते रहि गईनी होठवा के लाली रे , गुजरिया !

गारी संघे नीमन-नीमन नाच तू देखावेलु
चोना बढ़ावs कबो हाथ झमकावेलु
अचके में तनिका साs हो ओ ओ ओsss
अचके में तनिका सा हिलावेलु कमरिया !
देखते रहि गईनी होठवा के लाली रे गुजरिया !
जानतानी गारी तुहूँ झूठहिं सुनावेलु
मन में बा प्रीत तु हमसे छुपावेलु
ई गारी ना ह तोरs , हो ओ ओ ओsss
ई गारी ना ह तोर पर्दादारी हs गुजरिया !
देखते रहि गईनी होठवा के लाली रे गुजरिया !
बहुते नीक लागे तोरा मुंह से गारी रे , गुजरिया !
देखते रहि गईनी होठवा के लाली रे , गुजरिया !
देखते रहि गईनी होठवा के लाली रे , गुजरिया !

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