आँचरा से अंग-अंग आपन तोप ढांक के
मुड़ी निहुरा के, लमहर घूंघटा निकारि के
नवही कनियवा जब नापे ले डगरिया
नगरिया सगरो अचके में जाग गईल बा |
अलसात-पगुरात पाड़ी-पाड़ा बोले लागल
दायें-बाएं-आगे-पीछे खौरा कुकुर घूमें लागल
चुप भईल तनी देर कुहुकत कोयलिया
रुनक-झुनुक बाजे उनकर कंगन पायलिया
नगरिया सगरो अचके में जाग गईल बा |
खेलत-कूदत लईका मुंह बा के देखे लगले
घास गरहत बुढऊ हीक भर निरेखे लगले
मेहर सब झांके लगली खोली के केवड़िया
नवही कनियवा जब हेले ले दुअरिया
नगरिया सगरो अचके में जाग गईल बा |
खेतवा में सुतल सरसों नज़र परते नाचे लागल
जेने-जेने जाए दुल्हिन ओने-ओने ताके लागल
ढांक लेहलस घाम के नेहगर बदरिया
सांय-सांय पूछे पुरुवा तू केकर दुलहिनिया ?
नगरिया सगरो अचके में जाग गईल बा |
मुड़ी निहुरा के, लमहर घूंघटा निकारि के
नवही कनियवा जब नापे ले डगरिया
नगरिया सगरो अचके में जाग गईल बा |
अलसात-पगुरात पाड़ी-पाड़ा बोले लागल
दायें-बाएं-आगे-पीछे खौरा कुकुर घूमें लागल
चुप भईल तनी देर कुहुकत कोयलिया
रुनक-झुनुक बाजे उनकर कंगन पायलिया
नगरिया सगरो अचके में जाग गईल बा |
खेलत-कूदत लईका मुंह बा के देखे लगले
घास गरहत बुढऊ हीक भर निरेखे लगले
मेहर सब झांके लगली खोली के केवड़िया
नवही कनियवा जब हेले ले दुअरिया
नगरिया सगरो अचके में जाग गईल बा |
खेतवा में सुतल सरसों नज़र परते नाचे लागल
जेने-जेने जाए दुल्हिन ओने-ओने ताके लागल
ढांक लेहलस घाम के नेहगर बदरिया
सांय-सांय पूछे पुरुवा तू केकर दुलहिनिया ?
नगरिया सगरो अचके में जाग गईल बा |
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