बड़बड़ाने की आदत है न ....इसलिए

रविवार, 15 मई 2016

अब तोहरा के ना बईठाईब बुलेट पर बरजोरी
गोरीअब चलबू चलs अपना मन से .........

तहरा से भईल जब प्यार
  हँसे लागल गांव -जवार
कहाँ -कहाँ ना हमरा मिलल
बिना बात के मार .....

कबो हाथ टूटल कबो टंगरी.......केहू केश धइल केहू नटई
ना जाने कई बेर फुटल बा ........भुभुन कपार ...

गोरी ! प्रीत करबू कर अपना मन से .......
अब तोहरा के ना पीठीआईब  कतहूँ चोरी चोरी   
गोरी ! प्रीत करबू करs अपना मन से .......



तोहके गिफ्ट महंग हम देहनी
दुनिया भर से कर्जा लेहनी
कबो पेट जोगवनी आपन
कबो अपने घर चोरी कईनी
गाँव नगर के सोझा ......तोहरा बदे  फजीहत सहनी
थेंथर बन के पूरा कईनी .............तोहर सजी डिमांड ....

गोरी गिफ्ट धरबू धर अपना मन से.....
अब ना फेनु गिफ्ट खरिदेम करि के हम बकलोली
गोरी ! गिफ्ट धरबू धरs अपना मन से.....
 

प्रीत ना आईस पाईस
ना ताकत के आजमाइश
प्रीत ना झूठ देखावा
ना दोगला के पैदाइश
एक ठाँट पर हं भा ना के ......खुल के बोल च्वाइस
आव अबे दिल में ना ........जा दक्खिन  दरबार

गोरी ! उफर परबू परs अपना मन से ....
भौजाई ना आज के बाद से हमार संघतिया बोली
गोरी ! उफर परबू परs अपना मन से ....
पार्टी को गाली मत दो
नेताजी को कुछ मत बोलो
बाहर का अखबार पढ़ो
घर की खबरें मत खोलो
कितनी शान्ति हैं न ?..
सुशासन की शांति ....
शराब बंद है ;खुश हैं -
कमला , विमला और कांती ...
कांती का खसम
सूरत में था ,मर गया
कारखाने की आग में जल गया
अपने गांव की मिटटी भी
नसीब नहीं हुई उसको
और विमला की बेटी
सरकारी सायकिल से
जाती है कालिज को
"नॉलिज को" प्रोफेसर भी
नहीं हैं ढंग के
और रस्ते में छेड़ते हैं
लुच्चे लफंगे
दरोगा भी सुनता नहीं नालिश को
और चालीस पार की कमला का
पहले रेप हुआ ,
फिर पंचायत हुई और खसम मरा
बाद में खबर छपी तब केस हुआ
पर कातिल का दो दिन में ही बेल हुआ
उसके बाद लड़के का भी मर्डर हुआ
पर कोर्ट से कातिल को
बाइज्जत बरी करने का आर्डर हुआ
गुनहगार पिस्तौल थी
उसे फांसी दी गयी , चौराहे पर
उसके पुतले फूंके गए
राज के इशारे पर
यह विक्रमशिला के राजा का न्याय था
जिसके पीठ पर अगिया बैताल बैठा है
और सुशासन को युवराज का इन्तजार है
यह ओपन सीक्रेट है खुलेआम मत बोलो
पार्टी को गाली मत दो
नेताजी को कुछ मत बोलो .....

रविवार, 8 मई 2016

जवनी गंगा में
गूह -मूत कुल्हि बोरल  बा |
जवनी गंगा में
दुनिया भर के
कचरो- डभरो   घोरल बा |
जवनी गंगा में
कल -कारखाना के
कानो- पाँकी  - गाद- रसायन
जानबूझ के छोड़ल बा  |
जवनी गंगा के
छानल   साफ़ पानी
भी आई पी खातिर अगोरल बा |
जवनी गंगा के
सरत-महकत पानी
जनता के माथे थोपल बा  |
तवनी गंगा  में .... |
“सावधान !
गंगा ना ; गंगा माई कहs  |
हं भाई !
तवनी गंगा माई में
पहिले गोड़ डुबाईं  कि माथा
सोचे लागले काका ;
गंगा नहान के बेरा |
हं; काका साफे बुरबक हवुअन |