बड़बड़ाने की आदत है न ....इसलिए

रविवार, 15 मई 2016

पार्टी को गाली मत दो
नेताजी को कुछ मत बोलो
बाहर का अखबार पढ़ो
घर की खबरें मत खोलो
कितनी शान्ति हैं न ?..
सुशासन की शांति ....
शराब बंद है ;खुश हैं -
कमला , विमला और कांती ...
कांती का खसम
सूरत में था ,मर गया
कारखाने की आग में जल गया
अपने गांव की मिटटी भी
नसीब नहीं हुई उसको
और विमला की बेटी
सरकारी सायकिल से
जाती है कालिज को
"नॉलिज को" प्रोफेसर भी
नहीं हैं ढंग के
और रस्ते में छेड़ते हैं
लुच्चे लफंगे
दरोगा भी सुनता नहीं नालिश को
और चालीस पार की कमला का
पहले रेप हुआ ,
फिर पंचायत हुई और खसम मरा
बाद में खबर छपी तब केस हुआ
पर कातिल का दो दिन में ही बेल हुआ
उसके बाद लड़के का भी मर्डर हुआ
पर कोर्ट से कातिल को
बाइज्जत बरी करने का आर्डर हुआ
गुनहगार पिस्तौल थी
उसे फांसी दी गयी , चौराहे पर
उसके पुतले फूंके गए
राज के इशारे पर
यह विक्रमशिला के राजा का न्याय था
जिसके पीठ पर अगिया बैताल बैठा है
और सुशासन को युवराज का इन्तजार है
यह ओपन सीक्रेट है खुलेआम मत बोलो
पार्टी को गाली मत दो
नेताजी को कुछ मत बोलो .....

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