जवनी गंगा में
गूह -मूत कुल्हि
बोरल बा
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जवनी गंगा में
दुनिया भर के
कचरो- डभरो घोरल
बा |
जवनी गंगा में
कल -कारखाना के
कानो- पाँकी - गाद-
रसायन
जानबूझ के छोड़ल
बा
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जवनी गंगा के
छानल साफ़
पानी
भी आई पी
खातिर अगोरल बा |
जवनी गंगा के
सरत-महकत पानी
जनता के माथे
थोपल बा |
तवनी गंगा में
.... |
“सावधान !
गंगा ना ; गंगा
माई कहs |”
हं भाई !
तवनी गंगा माई
में
पहिले गोड़ डुबाईं कि
माथा
सोचे लागले काका ;
गंगा नहान के
बेरा |
हं; त काका
साफे बुरबक हवुअन
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