बड़बड़ाने की आदत है न ....इसलिए

शनिवार, 9 अप्रैल 2016

जा तारs परदेश पिया त
देश हीक भर देख के जा |
काs जाने जब अइबs तबलेक
देश रही कि ना ?


****जइसन दुनिया लउकेले उ ओइसन ना ह
****ई दर-देवाल-आंगन–घर मुर्दा पत्थर ना ह
***** जब संगिरहा करेवाला ना बाचि केहू
दर -देवाल - आँगन -घर
तब मजबूत रही कि ना ?

काs जाने जब अइबs तबलेक
देश रही कि ना ?



****रूप-जवानी के संगम बस थोरे दिन के होला
****भंवरा आ कली के मिलना बस बसंत में होला
*****भले भंवरा बसंत गईल पर निकट कली के जाओ
मुरझाईल कली के सुंदर
रूप रही कि ना ?

काs जाने जब अइबs तबलेक
देश रही कि ना ?



****रूप रंग रस गंध के सेवन बूढ देह बदे ना ह
****थाकल तन पाकल मन के जिनगी के भरोसा का ह
*****ई हरमेशा के छुदुर जीवन रही सदा लुलुवाईल
बाकिर भोग करें खातिर
संजोग बची कि ना

का जाने जब अइबs तबलेक
देश रही कि ना ?



जा तारs परदेश पिया त
देश हीक भर देख के जा |
काs जाने जब अइबs तबलेक
देश रही कि ना ?



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