बड़बड़ाने की आदत है न ....इसलिए

गुरुवार, 19 फ़रवरी 2015

 हुनकर रसगुल्ला बड़हन बा
हुनकर कनबाली दमिल बा
हुनकर साड़ी जरी- बनारसी
आ हुनकर पायल भारी बा
आ हुनका बम में बेशी दम बा
हुनकर फुलझरिया धाँसू बा
बा हुनका लगे अनार मरिचाई
छुरछुरियो बा आकाशियो बा
हऊ हमरा घरे ना अईले
हऊ हमरा घर के ना खइले
हऊ बड़ा टेढ़ बतियावेले
जे हमारा मन के ना कईले
हर बात पर रगड़ा- झगड़ा जी
कुछ मनभीतर कुछ बहरा जी
कईसन बीतल यह साल दिवाली
दियना जरल कि जियरा जी ?

२)
चानी पर के केश
धीरे धीरे कर के सगरो झर गईल |
एगो- दुगो दाढ़ी के बाल पर
टटका सफेदी पसर गईल |
अँखियाँ के नीचे-
झुर्री पर गईल ;
चमड़ा सिकुड़ गईल |
बी ए ,भा एम ए ,भा पि एच डी -
कुल्हि पढ़ाई ,पढ़ते -पढ़त सपर गईल |
पहिले जे कहल तोहके चाचा
अबके उहो चाचा बन गईल |
ऐ भाई , गांव भर के गोधन त कुटा गईल
तोहार गोधन कहवाँ बिचिल गईल ?

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