पत्नी के प्रति
अभी कुछ ही दिन हुए
हमारी शादी को ,
जब एक ही गाँठ से
बंधे थे हम दोनों |
मैं बारात लेकर गया था
तुम्हारे घर |
और लगभग
अपहरण करता हुआ
लाया था तुम्हे
अपने घर |
फिर खोल दी गयी गांठे
कि मैं निस्सीम आकाश में
उड़ सकूँ ; कर सकूँ
जो भी करना है मुझे |
पर शायद ठीक से
गिरह खुली नहीं थी ,
क्योंकि आज भी
महसूस करता हूँ -
एक खिंचाव
तुम्हारी ओर |
शायद यही प्रेम है
जो आरक्षित रहेगा
सिर्फ तुम्हारे लिए |
अभी कुछ ही दिन हुए
हमारी शादी को ,
जब एक ही गाँठ से
बंधे थे हम दोनों |
मैं बारात लेकर गया था
तुम्हारे घर |
और लगभग
अपहरण करता हुआ
लाया था तुम्हे
अपने घर |
फिर खोल दी गयी गांठे
कि मैं निस्सीम आकाश में
उड़ सकूँ ; कर सकूँ
जो भी करना है मुझे |
पर शायद ठीक से
गिरह खुली नहीं थी ,
क्योंकि आज भी
महसूस करता हूँ -
एक खिंचाव
तुम्हारी ओर |
शायद यही प्रेम है
जो आरक्षित रहेगा
सिर्फ तुम्हारे लिए |
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