तो ,एक गुब्बारा था -बहुत बड़ा ...| इतना बड़ा कि आजतक किसी ने भी इस तरह
का कोई गुब्बारा नहीं देखा था | या जिन्होंने देख रखा था उन्हें ठीक-ठीक
याद नहीं आ रहा था कि इतना बड़ा कोई गुब्बार होता भी होगा | करीब- करीब
सभी लोगों ने यह मान लिया था कि वह बहुत बड़ा गुब्बारा था ;या कि सबसे बड़ा
गुब्बारा था |
उस समय के किसी आर्किमिडीज ने कह रखा था कि ज्यादा बड़ा गुब्बारा ज्यादा जगह छेंकता है ;और ज्यादा जगह छेंकने के लिए आस पास की हवा को धकिया कर बाहर फेंकना पड़ता है | सो , उस बड़े गुब्बारे ने भी ऐसा ही किया |बल्कि इसी धकियाने के क्रम में उसने आस पास के कुछ गुब्बारों को भी धकिया कर बाहर कर दिया | लोगों को इसमें कुछ भी बुरा नहीं लगा |-"भई , बड़ा गुब्बारा जगह तो छेंकेगा ही | ऐसे में एक दो गुब्बारे इधर उधर होतें भी हैं तो क्या फर्क पड़ता है ?"- ऐसा लोगों ने उस आर्किमिडीज के कहने पर सोचा या खुद अपने मन से -यह बात उतने महत्व की नहीं है |
धीरे-धीरे बड़े गुब्बारे ने अपने आस पास की हवा को पूरी तरह बदल दिया | उसके आस पास इकठ्ठी हवा ने उसे ऊपर ..,और ऊपर चढ़ने में मदद किया |चढ़ते चढ़ते बड़ा गुब्बारा एकदम से आकाश पर चढ़ बैठा |लोगों ने किसी आर्किमिडीज के कहने में आकर या खुद अपने मन से ही यह सोचा लिया कि 'चलो, अच्छा ही हुआ !इतने बड़े गुब्बारे के लिए यही असली जगह है |' लोगों के लिए गुब्बारा अपने खुद के बड़प्पन का प्रतीक था |अपने खुद के बड़प्पन को इतने ऊँचे आकाश में चढ़ते देख लोग खूब खुश हुए , तालियां बजायी , और अपने घरेलू काम में लग गए |
बड़ा गुब्बारा निस्सीम आकाश में इधर उधर उड़ कर अपनी बड़प्पन का प्रचार करता रहा | लोगों को इसमें कुछ भी बुरा नहीं लगा | लोग गुब्बारे के प्रचार को अपनी बड़प्पन का प्रचार मानते थे | हालाँकि आकश में बहुत दूर निकल जाने पर बड़ा गुब्बारा कुछ कुछ छोटा दिखने लगता था , लेकिन लोगों ने इसे अपना मतिभरम माना | उन्हें गुब्बारे के बड़ापन पर कोई संदेह न था |
लोगों को यह बात बहुत पहले से पता थी कि ऊपर पहुँच कर गुब्बारे और ज्यादा बड़े हो जाते हैं ,बल्कि फूल जाते हैं | फिर धीरे धीरे उनकी हवा निकलती है और अंततः वे जमीन पर गिर जाते हैं | लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में कुछ समय लगता है | और इतनी सारी बाते उन्हें किसी आर्किमिडीज ने बिलकुल नहीं बताई , बल्कि लोगों ने इसके पहले भी कई गुब्बारे देख रखे थे | लोगों को अपने अनुभवों पर भरोसा था | और लोगों को अपने अनुभवों से ज्यादा उस गुब्बारे पर भरोसा था ,जो बहुत बड़ा था |इतना बड़ा कि जिसकी हवा निकलने में अभी बहुत समय लगता |
पर बड़ा गुब्बारा एकदम ऊपर पहुँच कर कुछ ज्यादा ही फूल गया था |कुछ लोग कहने लगे कि बड़ा गुब्बारा फूल कर सूरज से भी बड़ा हो गया है |सच जानने के लिए लोग आर्किमिडीज के पास गए | अव्वल तो वह आर्किमिडीज सूरज के बारे में कुछ भी नहीं जानता था ,लेकिन इस बार उसने गुब्बारे के बारे भी कुछ बोलने से इंकार कर दिया |उसके पास कई घरेलू काम थे जो निपटाने जरूरी थे |
बाकी लोगों के पास भी कई घरेलू काम थे ,जिनका निपटान जरूरी था |लेकिन बीच बीच में वे गुब्बार्रे कि खबर लेते रहते |ऐसे ही किसी दिन लोगों ने गुब्बारे कि हवा निकलने कि बात सुनी | फिर एक दिन गुब्बारे के जमीन पर गिरने की खबर भी मिल गयी | लोग सच जानने के लिए उस आर्किमिडीज को खोजने लगे जिसने उस गुब्बारे के बारे में इतनी सारी बातें कही थी |पर उस आर्किमिडीज की दूर दूर तक कोई खबर नहीं थी | लोगों को संदेह हुआ - ऐसा कोई आर्किमिडीज था भी या नहीं ? लोगों ने इस प्रश्न के उत्तर के लिए एक दूसरे को देखा | उन्हें कोई जवाब नहीं मिला | लोगों ने यह प्रश्न खुद से भी पूछा | इसबार भी कोई जवाब नहीं मिला | हार-पाछ कर लोगों ने यह मान लिया कि ऐसा कोई आर्किमिडीज था ही नहीं | गुब्बारे के बारे में सारी बाते लोगों ने खुद अपने मन से गढ़ी थी |
..फिर उन्हें खुद पर संदेह होने लगा ; अपने अनुभवों पर संदेह होने लगा |
झेंप मिटाने के लिए लोगों ने नए गुब्बारे कि खोज शुरू की |फिर ...एक नया गुब्बारा सामने आया | वह बड़ा तो क्या था ,बल्कि एक पुराने गुब्बारे का फटा हुआ हिस्सा था, जिसमें जबरदस्ती हवा भर कर एक "टिमकी" भर बना दिया गया था | लोगो को इससे कोई आपत्ति नहीं थी | वे बड़े गुब्बारे से सम्बंधित अपने अनुभवों से धोखा खा चुके थे |
सुना है कि वह नया गुब्बारा कई दुसरे गुब्बारे के साथ उड़ने के फिराक में है | अब तो वह आर्किमिडीज भी लौट आया है | पर गुब्बारे के बारे में उसकी जानकारी को कोई मानने को तैय्यार नहीं है | लोग पहले ही काफी धोखा खा चुके हैं | उन्होंने नए गुब्बारे को वहां तक उड़ने दिया ,जहां तक उसकी उड़ने कि औकात थी |लोगों को इसमें भी अपना बड़प्पन ही दिखा |
[नोट :- आर्किमिडीज उत्प्लावकता के सिद्धांत का आविष्कारक थे और टिमकी गुब्बारे के फ़टे हिस्से में हवा भर कर बनायीं जाती है |]
उस समय के किसी आर्किमिडीज ने कह रखा था कि ज्यादा बड़ा गुब्बारा ज्यादा जगह छेंकता है ;और ज्यादा जगह छेंकने के लिए आस पास की हवा को धकिया कर बाहर फेंकना पड़ता है | सो , उस बड़े गुब्बारे ने भी ऐसा ही किया |बल्कि इसी धकियाने के क्रम में उसने आस पास के कुछ गुब्बारों को भी धकिया कर बाहर कर दिया | लोगों को इसमें कुछ भी बुरा नहीं लगा |-"भई , बड़ा गुब्बारा जगह तो छेंकेगा ही | ऐसे में एक दो गुब्बारे इधर उधर होतें भी हैं तो क्या फर्क पड़ता है ?"- ऐसा लोगों ने उस आर्किमिडीज के कहने पर सोचा या खुद अपने मन से -यह बात उतने महत्व की नहीं है |
धीरे-धीरे बड़े गुब्बारे ने अपने आस पास की हवा को पूरी तरह बदल दिया | उसके आस पास इकठ्ठी हवा ने उसे ऊपर ..,और ऊपर चढ़ने में मदद किया |चढ़ते चढ़ते बड़ा गुब्बारा एकदम से आकाश पर चढ़ बैठा |लोगों ने किसी आर्किमिडीज के कहने में आकर या खुद अपने मन से ही यह सोचा लिया कि 'चलो, अच्छा ही हुआ !इतने बड़े गुब्बारे के लिए यही असली जगह है |' लोगों के लिए गुब्बारा अपने खुद के बड़प्पन का प्रतीक था |अपने खुद के बड़प्पन को इतने ऊँचे आकाश में चढ़ते देख लोग खूब खुश हुए , तालियां बजायी , और अपने घरेलू काम में लग गए |
बड़ा गुब्बारा निस्सीम आकाश में इधर उधर उड़ कर अपनी बड़प्पन का प्रचार करता रहा | लोगों को इसमें कुछ भी बुरा नहीं लगा | लोग गुब्बारे के प्रचार को अपनी बड़प्पन का प्रचार मानते थे | हालाँकि आकश में बहुत दूर निकल जाने पर बड़ा गुब्बारा कुछ कुछ छोटा दिखने लगता था , लेकिन लोगों ने इसे अपना मतिभरम माना | उन्हें गुब्बारे के बड़ापन पर कोई संदेह न था |
लोगों को यह बात बहुत पहले से पता थी कि ऊपर पहुँच कर गुब्बारे और ज्यादा बड़े हो जाते हैं ,बल्कि फूल जाते हैं | फिर धीरे धीरे उनकी हवा निकलती है और अंततः वे जमीन पर गिर जाते हैं | लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में कुछ समय लगता है | और इतनी सारी बाते उन्हें किसी आर्किमिडीज ने बिलकुल नहीं बताई , बल्कि लोगों ने इसके पहले भी कई गुब्बारे देख रखे थे | लोगों को अपने अनुभवों पर भरोसा था | और लोगों को अपने अनुभवों से ज्यादा उस गुब्बारे पर भरोसा था ,जो बहुत बड़ा था |इतना बड़ा कि जिसकी हवा निकलने में अभी बहुत समय लगता |
पर बड़ा गुब्बारा एकदम ऊपर पहुँच कर कुछ ज्यादा ही फूल गया था |कुछ लोग कहने लगे कि बड़ा गुब्बारा फूल कर सूरज से भी बड़ा हो गया है |सच जानने के लिए लोग आर्किमिडीज के पास गए | अव्वल तो वह आर्किमिडीज सूरज के बारे में कुछ भी नहीं जानता था ,लेकिन इस बार उसने गुब्बारे के बारे भी कुछ बोलने से इंकार कर दिया |उसके पास कई घरेलू काम थे जो निपटाने जरूरी थे |
बाकी लोगों के पास भी कई घरेलू काम थे ,जिनका निपटान जरूरी था |लेकिन बीच बीच में वे गुब्बार्रे कि खबर लेते रहते |ऐसे ही किसी दिन लोगों ने गुब्बारे कि हवा निकलने कि बात सुनी | फिर एक दिन गुब्बारे के जमीन पर गिरने की खबर भी मिल गयी | लोग सच जानने के लिए उस आर्किमिडीज को खोजने लगे जिसने उस गुब्बारे के बारे में इतनी सारी बातें कही थी |पर उस आर्किमिडीज की दूर दूर तक कोई खबर नहीं थी | लोगों को संदेह हुआ - ऐसा कोई आर्किमिडीज था भी या नहीं ? लोगों ने इस प्रश्न के उत्तर के लिए एक दूसरे को देखा | उन्हें कोई जवाब नहीं मिला | लोगों ने यह प्रश्न खुद से भी पूछा | इसबार भी कोई जवाब नहीं मिला | हार-पाछ कर लोगों ने यह मान लिया कि ऐसा कोई आर्किमिडीज था ही नहीं | गुब्बारे के बारे में सारी बाते लोगों ने खुद अपने मन से गढ़ी थी |
..फिर उन्हें खुद पर संदेह होने लगा ; अपने अनुभवों पर संदेह होने लगा |
झेंप मिटाने के लिए लोगों ने नए गुब्बारे कि खोज शुरू की |फिर ...एक नया गुब्बारा सामने आया | वह बड़ा तो क्या था ,बल्कि एक पुराने गुब्बारे का फटा हुआ हिस्सा था, जिसमें जबरदस्ती हवा भर कर एक "टिमकी" भर बना दिया गया था | लोगो को इससे कोई आपत्ति नहीं थी | वे बड़े गुब्बारे से सम्बंधित अपने अनुभवों से धोखा खा चुके थे |
सुना है कि वह नया गुब्बारा कई दुसरे गुब्बारे के साथ उड़ने के फिराक में है | अब तो वह आर्किमिडीज भी लौट आया है | पर गुब्बारे के बारे में उसकी जानकारी को कोई मानने को तैय्यार नहीं है | लोग पहले ही काफी धोखा खा चुके हैं | उन्होंने नए गुब्बारे को वहां तक उड़ने दिया ,जहां तक उसकी उड़ने कि औकात थी |लोगों को इसमें भी अपना बड़प्पन ही दिखा |
[नोट :- आर्किमिडीज उत्प्लावकता के सिद्धांत का आविष्कारक थे और टिमकी गुब्बारे के फ़टे हिस्से में हवा भर कर बनायीं जाती है |]
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