बड़बड़ाने की आदत है न ....इसलिए

शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2015

गतर -गतर काटल -छेदल
इंहवा उंहवा शर से बेधल
पीरा से रोवत असहाय
रावन धरती पर छटपटाय
**********नजदीक राम गईनी देखे
********** संग बानर रीछ लखन लेके
**********भईनी रावन के सोझ खाड़
**********मन में उपजल तनी दयाभाव
कहनी –दशमुख! ई गति देखs
कुकरमी के नियति देखs
जे पाप करत में अघा जाला
ओकरा अखियन चर्बी चढ़ जाला
**********उ अइसने मउअत मरेला
********** आपन हीत -नात संघे जरेला
**********रोवेला ओकर घर -परिवार
**********फेंकरेला ओकरे नांवे सियार
लंकेश बिहँस कहलस -हे राम !
अब निकले जात बा हमार प्रान
एतने हमार नियति ना हs
खलिहा हमरे गलती ना ह s
**********हंs , सीता से बरजोरी कईनी
**********इहे लमहर गलती कईनी
**********तू कटलs बहिन के नाक कान
**********उ अपराध ना रहे काs, राम ?
एगो अउरी चूक हमसे भईल
ओहि लागले हमला ना कईल
जदि खलिहा "नाक" बदे लड़ींतीं
अइसन हार हम ना हरतीं
***********खानदान के नाक के बात रहित
***********से विभीषणों के भी साथ मिलित
***********जदी केकरो नज़री से ना गिरीतीं
*********** निश्चय मानs; हम ना हरतीं
जे उच्च नैतिकता पर लडेला
जग ओकरे मदद करेला
हम आपन आदर्श गिरा देहिनी
बड़का भारी गलती कईनी
**********जदी युद्ध लंका में ना होइत
**********भलुक किष्किन्धा में होइत
**********त हमरा सेना में जोश रहित
**********इज्जत खातिर प्रतिशोध रहित
तोहरा मन के अपराध-भाव
खुदे तोहरा के करित नाश
देवता- देवी- वानर -किरात
केहु ना दिहित तोहर साथ
**********एतने कहि रावण मरि गईलस
**********बाकिर असली बतिया कहि गईलस
***********जे आदर्श बदे लडेला
**********विजय ओकरे साथे रहेला

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