बड़बड़ाने की आदत है न ....इसलिए

शनिवार, 23 जनवरी 2016

साधो गज़ब तमाशा देखा
गदह-पूंछ पकड़े है धोबी पीछे-पीछे जाए
दुलत्ती खाए कितना भी पर पूंछ नहीं बिलगाये
यह मंद बुद्धि का लेखा
साधो गज़ब तमाशा देखा


चाम जीभ की बजै निरंतर जब-जब निकसे बोली
मरे चाम का ढोल बना कर पुरकस पिटे ढोली
झूठा -सच - अशुद्ध -मटमैला
साधो गज़ब तमाशा देखा


सबके सर में भुस भरे है सुलग रहे है भीतर
अपनी कुंठा जग को दे गए लेक्चर दिए फटीचर
बातें बड़े गुड़ का भेला
साधो गज़ब तमाशा देखा


क्या कहिये, क्या सुनन-जोग है ,किसकी बात बिचारें
सब के सब हैं मतिभ्रमित, ये अंधे भक्त बेचारे
सबको बूझो यहां गपेड़ा
साधो गज़ब तमाशा देखा

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