एक दिन के बात हवे की हम गईनी ससुरारी
पहिला पहिला बेर रहे जब से भईल रहे शादी
ससुरारी गईला से पहिले करिया केश रंगवनी
दुइ हज़ार के जूता कीननी दस के कोट सियवनी
पहिला पहिला बेर रहे जब से भईल रहे शादी
ससुरारी गईला से पहिले करिया केश रंगवनी
दुइ हज़ार के जूता कीननी दस के कोट सियवनी
असली में ई बात झूठ बा रउवा बुझीं सहीं
पैंतीस किलो चिउरा कीननी दस तौला के दही
सारिन खातिर जींस खरीदनी सरहज खातिर साड़ी
एक दिन के बात हवे की हम गईनी ससुरारी
तीन कोस जाए खातिर काका के सायकिल लेहनीं
पावडिल दाब के सीट चहड़ के इलू इलू गाना गवनीं
बहरिये ससुर भेंटाइल रहले राम-राम हम कहनी
उनका पुछला पर हम घर के खबर-दबर सब कहनीं
जाके खटिया पर बइठनी मिसरी से पियनीं पानी
एक दिन के बात हवे की हम गईनी ससुरारी
सारिन सारवा सब आइलैं सं अवुरी अईली सरहज
हमरा के अइसन घेरले सं बुझीं जइसे अलवंज
उ सभन के हंसी ठिठोली हमरा मने ना भावे
छव बजे मुक्ति मिलल जब भईंस लागल रम्भावें
सारवा सब छोट रहले सं ससुरा रहे लापाता
भईंस हमरे दूहे के परल टूटल दामाद ससुर के नाता
खोल के मोजा –जूता- कोट के भितरे देहनी गारी
एक दिन के बात हवे की हम गईनी ससुरारी
कान पकड़ के उठक बईठक तब हम उहँवे कईनी
ओकरा बाद से ना कबो हम ससुरारी के गईनी
पैंतीस किलो चिउरा कीननी दस तौला के दही
सारिन खातिर जींस खरीदनी सरहज खातिर साड़ी
एक दिन के बात हवे की हम गईनी ससुरारी
तीन कोस जाए खातिर काका के सायकिल लेहनीं
पावडिल दाब के सीट चहड़ के इलू इलू गाना गवनीं
बहरिये ससुर भेंटाइल रहले राम-राम हम कहनी
उनका पुछला पर हम घर के खबर-दबर सब कहनीं
जाके खटिया पर बइठनी मिसरी से पियनीं पानी
एक दिन के बात हवे की हम गईनी ससुरारी
सारिन सारवा सब आइलैं सं अवुरी अईली सरहज
हमरा के अइसन घेरले सं बुझीं जइसे अलवंज
उ सभन के हंसी ठिठोली हमरा मने ना भावे
छव बजे मुक्ति मिलल जब भईंस लागल रम्भावें
सारवा सब छोट रहले सं ससुरा रहे लापाता
भईंस हमरे दूहे के परल टूटल दामाद ससुर के नाता
खोल के मोजा –जूता- कोट के भितरे देहनी गारी
एक दिन के बात हवे की हम गईनी ससुरारी
कान पकड़ के उठक बईठक तब हम उहँवे कईनी
ओकरा बाद से ना कबो हम ससुरारी के गईनी
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