भारी पाप….. महापराध…….. बाम्हन के मौत | दोसी बा सगरो गांव | अब
केहु चैन से ना रहि पायी | गांव में कुकुर फेंकरिहेंसन; सियार बोलिहेंसन
|बाम्हन के मउअत भईल बा ……….|ना ई हतिया हा ,कुल्हि गांव मिल के कईले बा |
काल्ह दुपहरिये में पंचाईत बइठल रहे | एक ओर भिरगु बाबा ; दोसर ओर रासबिहारी के लईका |भिरगु बाबा अपना माई के कजिया में करजा लेहले रहले | आजु लेक ना लौटवले | लौटावास कहाँ से ? भिरगु बाबा खानदानी भिखारी | घरे-घरे सीधा-चाउर , दान-दच्छिना माँगेले | ओहि से गरज चल जाला | घर में उ आ उनकर मेहरारू दू बेकत | एगो लईका रहे , पता ना कवन बेमारी से खतम हो गईल | ओकरो दवा -बीरो में रासबिहारी से करजा लेहले रहले भिरगु बाबा | बाकिर आपने पलानी के पीछे के खेत रास बिहारी के नावे लिख देहले | अब जर-जमा में खाली पलानी रखे भर के जमीन बाँचि गईल बा |कहाँ से करजा लउटावस भिरगु बाबा ?
काल्ह दुपहरिये में पंचाईत बइठल रहे | एक ओर भिरगु बाबा ; दोसर ओर रासबिहारी के लईका |भिरगु बाबा अपना माई के कजिया में करजा लेहले रहले | आजु लेक ना लौटवले | लौटावास कहाँ से ? भिरगु बाबा खानदानी भिखारी | घरे-घरे सीधा-चाउर , दान-दच्छिना माँगेले | ओहि से गरज चल जाला | घर में उ आ उनकर मेहरारू दू बेकत | एगो लईका रहे , पता ना कवन बेमारी से खतम हो गईल | ओकरो दवा -बीरो में रासबिहारी से करजा लेहले रहले भिरगु बाबा | बाकिर आपने पलानी के पीछे के खेत रास बिहारी के नावे लिख देहले | अब जर-जमा में खाली पलानी रखे भर के जमीन बाँचि गईल बा |कहाँ से करजा लउटावस भिरगु बाबा ?
आ एही
बात पर रास बिहारी के लइका उनका के दू तमेचा मार देहले रहे बीच चौराहा पर |
भिरगु बाबा गरीब रहलेहन बाकिर इज्जतदार | सोचले जे-- का लंगा के मुँहे
लागे के हा |फरियावता पंचाईत करी |इज्जतदार बाम्हन के मुंह पर तमेचा गलत
बात बा | रासबिहारी के लइका के गोड़ ध के माफ़ी मांगे के परी |बाकिर भिरगु
बाबा के पहिला बेर लागल जे लोग सत्त-असत पर बिचार ना क के रुपिया पैसा पर
ढेर बिचार करत बा | केहु हूँ हाँ नइखे करत | सब लोग चुप चाप बा | आ
रासबिहारी के लइका कहत बा जे हमार उधारी लौटा देस हम माफ़ी मांग लेब |
पंडीजी लोग के मुंह ताकत रहले | जब केहु उनकर पक्ष ना लिहल त कहले जे हमारा लगे पैसा त नइखे बाकिर पलानी वाला जमीन हम तोरा नांवे लिख देम | तुरते कागज आईल आ बाबा तुरते साइन करि देहले |ओकरा बाद भरल सभा में बाबा के गोड़ ध के रासबिहारी के लइका माफ़ी मंगलस ---बाबा हमारा से गलती हो गईल मांफ करि दिंहिं | आ भिरगु बाबा परम प्रसन्न दुनू हाथ उठा के आशीर्वाद देहले --- विजयी होखा बेटा , यश मिलो | अपना तमेचा के बदला पंडीजी ले लेहले | सब लोग अपना अपना घरे चल गईल | जाते-जाते रासबिहारी के लईका पंडीजी से कहि गईल -- काल्ह बिहाने लेक पलानी खाली हो जाये के चाहीं , ना त घर में से घींच के बाहर करि देम |
हम रहेम कहाँ हो ? भिरगु बाबा के काठी मारि देहले रहे |
आ अजु भिरगु बाबा के देहि काठ हो गईल बा |उ अपना मेहरारू संघे माहुर खा लेहले बाड़े | लोग फूंके के काम में लागल बा | डर सबका मन में बा |बरहम पिशाच के |आ कि अपना मन के पिशाच के ? जवन छुपे छुपे भिरगु बाबा के जान ले लेहलस ? रासबिहारी के लइका जवन उनका के कहले रहे जे हमारा मुड़ी पर ना नु रहबा आजु कान्हा पर ढ़ो के ले जाता | अब उनकर पलानी के लगे उनकर किरिया करम होइ |ओहिजा मंदिर बनी |
पंडीजी लोग के मुंह ताकत रहले | जब केहु उनकर पक्ष ना लिहल त कहले जे हमारा लगे पैसा त नइखे बाकिर पलानी वाला जमीन हम तोरा नांवे लिख देम | तुरते कागज आईल आ बाबा तुरते साइन करि देहले |ओकरा बाद भरल सभा में बाबा के गोड़ ध के रासबिहारी के लइका माफ़ी मंगलस ---बाबा हमारा से गलती हो गईल मांफ करि दिंहिं | आ भिरगु बाबा परम प्रसन्न दुनू हाथ उठा के आशीर्वाद देहले --- विजयी होखा बेटा , यश मिलो | अपना तमेचा के बदला पंडीजी ले लेहले | सब लोग अपना अपना घरे चल गईल | जाते-जाते रासबिहारी के लईका पंडीजी से कहि गईल -- काल्ह बिहाने लेक पलानी खाली हो जाये के चाहीं , ना त घर में से घींच के बाहर करि देम |
हम रहेम कहाँ हो ? भिरगु बाबा के काठी मारि देहले रहे |
आ अजु भिरगु बाबा के देहि काठ हो गईल बा |उ अपना मेहरारू संघे माहुर खा लेहले बाड़े | लोग फूंके के काम में लागल बा | डर सबका मन में बा |बरहम पिशाच के |आ कि अपना मन के पिशाच के ? जवन छुपे छुपे भिरगु बाबा के जान ले लेहलस ? रासबिहारी के लइका जवन उनका के कहले रहे जे हमारा मुड़ी पर ना नु रहबा आजु कान्हा पर ढ़ो के ले जाता | अब उनकर पलानी के लगे उनकर किरिया करम होइ |ओहिजा मंदिर बनी |
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