बड़बड़ाने की आदत है न ....इसलिए

मंगलवार, 6 जनवरी 2015

हंडिया - पतुकी - बटुली - खोरा
निकलल ढिंढ आ बबुआ कोरा
मरियल देंह आ माँगे सेनुर
मन पसंगा भर, मन -भर सबुर
बियहुति साड़ी में छप्पन पेवन
लड़िकयिएँ में बुढाईल जोबन
चूल्हा- चौकी बर्तन - बासन
छोड़ल-छाड़ल उनकर अगरासन
बाहरो- भितरो घरवो -दुअरोँ
सास- ससुर- देयादीन - देवरो
एतना सगरो के मलिकाइन
गरीब "टहलुआ "के मलिकाइन

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