बड़बड़ाने की आदत है न ....इसलिए

बुधवार, 7 जनवरी 2015

सब कुछ अपने आप हो जाला | कूकर में भात-दाल बन जाला | लंच खातिर चार गो परवठा बन जाला | जब लेक उनकर मरद नहा-धोआ के निकलेले , तब ले उनकर जूता-मोजा,शॉर्ट-पाईन्ट उनका लगे पहुँच जाला | चट देना चाय बन जाला | खा -पी के उनकर मरद डियूटी चल जाले | फेन शुरू होला घर के धोवाई-पोछाई, आपन नहान - धेयान ,पूजा-पाठ भोजन-छाजन | तब तनी टाइम मिलेला त देहि के सोझ क लेली , चाहे सीरियल के रिपीट देख लेली | एही बीच में आँचार के घाम लगावल, आ कुल्हि सियन-बिनन के काम निपटा देली |सब कुछु अपने आप हो जाला ; माने बिना बिशेष परयास के | रोज रोज एके गो चीझ ....जैसे कवनो मशीन आपन काम करत होखे |तले लेक साँझ हो जाला | आँचार के घर में रख देली |सोफ़ा के सरिहार देली | रिमोट के टेबुल पर ध देली;अब उनका मरद के घरे आवे के टाइम हो गईल बा |
रोज पांच बजे लेक चलि आवे ले | आज साढ़े पांच हो गईल | कहे ना आईले अबलेक ? जाम में फंस गईल होईहें | अच्छा तलेलेक दूध में चाहपत्ती आ चीनी मिला के रख देहली ,जे अइहें त चट देनी चाय बना दीहें |बुझाता जे केहु केवाड़ी ठकठकावत बा |आ गईले का ? आ धत तेरी के , केहु ना ह | एहिंगा कान बाजत रहेला | बाक़िर छव बज गईल | हे भगवान कवनो गड़बड़ी नईखे नु भईल ? ई मुआ फोनवो नईखे लागत | यह घरी ढेरकुल्हि बम ब्लास्ट के खबर सुने में आवेला | बाक़िर आज के समाचार में त कवनो खबर नईखे | समाचार चैनल लगा देहली , कि उ आवेले त पहिले समाचार देखेले | अब बालकनी में खड़ा हो के आपन मोटर सयकिल के आवाज चिन्हे लगली |लोग आवत जात त बा |… हो गईल होइ कवनो काम |… एह घरी ऑफिस वाला खून चूस लेत बड़ेसन ओभर ड्यूटी करा के | …अच्छा अइहें त हारल-खेदायिल नु आईहें |सोचली जे तनी चिउरा मुमफली भुज लेस …. चाय के साथे खाए खातिर | किचन में गईली |अबहिन भुजते रहली कि उनका मरद के आइला के आवाज सुनाई दिहल | सब कुछ छोड़ छाड़ के केवाड़ी खोले भगली | धक –धक……. आ गईले का ? जबले उ केवाड़ी खटखटावास ओकरा से पहिलहीं खोल देहली |
कहाँ रहनी हा एतना देर ?
अरे एक जाना गांव के भेंट गईल रहलाहान |
चाय बना दी ? पीएब ?
जरूरत त नईखे ; बना देबू त पी लेब | एतना कहि के उनकर मरद हाथ गोड़ धोवे चल जाले , आ उ किचन में चाय बनावे |
फेन सब कुछ अपने आप हो जाला | अपने आप चाय बन जाला |टिभी देखत उनकर मरद चाय पी लेले | उ किचन में डिनर बनावे चल जाली | जइसे कवनो मशीन होखे ......बिना परयास के काम करे......अपने आप.......रोज रोज | बाक़िर कराही में भुजे खातिर धईल चिउरा जर के खोंता हो जाला .......रोज रोज |

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