बड़बड़ाने की आदत है न ....इसलिए

रविवार, 11 जनवरी 2015

हम त बोलनी ढेर अब रउआ बोलीं
बोलीं , बोल के कान में मिसरी घोरीं |

नेह बा रउआ खातिर हमरा मन में
हमरा बदे रउआ मन में का बा , बोलीं  |

ढेर दिन से हम अकेलहीं बोलत बानी
रउओ त आपन दिल के राज खोलीं  |

प्रीत हम कइनीं,निबहनी,बोल देहनीं
मत रउआ मुड़ी झुका माटी निखोरीं |

मन ई संसय के भंवर में डूबल जाता
रउआ अब हं भा ना कुछऊ त बोलीं |

हम त बोलनी  ढेर अब रउआ बोलीं |     

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