ए हवा ! जनि तू हमरा के डोलावSS |
मत छुवS तू देह, धोती मत हिलावSS |
आज हम संसार से परेशान बानी
सुत
गईल बा दर्द ओहिके मत जगावSS |
प्रीत
कईनी हम जहाँ :घात मिलल
पीठ पर
ना हाथ मिलल :
लात मिलल
दुश्मनों
से घटिया रिश्ता - नात मिलल
मत तू
हमके प्रेम से “आपन” बोलावSS |
ए हवा, जनि छुवS तू देह धोती मत हिलावSS |
जे सटल
लगे :आपन लाभ खातिर
हं-में-हं कईल, अपना
स्वार्थ खातिर
गरज पडला पर भईल कबो ना हाज़िर
मत
तुहु एतना अब नजदीक आवSS |
ए हवा, जनि छुवS तू देह धोती मत हिलावSS
मन ह
कुकुरपोंछी : ई
ना सुधरिहैं
भले आग में ई फतिंगा जरि के मरिहैं
फेनु से ई प्रीत करिहैं : फेनु से उफर परिहैं
देह के छूवलुS त अब जियरा में आवSS
|
ए हवा,जनि छुवS तू
देह धोती मत हिलावSS |
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