बड़बड़ाने की आदत है न ....इसलिए

बुधवार, 7 जनवरी 2015

ए  हवा ! जनि तू हमरा के डोलावSS |
 मत छुवS तू देह, धोती मत हिलावSS |
आज हम संसार से परेशान बानी
 सुत गईल बा दर्द ओहिके मत जगावSS |
 प्रीत कईनी हम जहाँ :घात मिलल
 पीठ पर ना हाथ मिलल : लात मिलल
 दुश्मनों  से घटिया  रिश्ता - नात मिलल
 मत तू हमके प्रेम से आपन बोलावSS |
 ए हवा, जनि छुवS तू देह धोती मत हिलावSS |
 जे सटल लगे :आपन लाभ खातिर
 हं-में-हं कईल, अपना स्वार्थ खातिर
गरज पडला पर भईल  कबो ना हाज़िर
 मत तुहु एतना अब नजदीक आवSS |
 ए हवा, जनि छुवS तू देह धोती मत हिलावSS
 मन ह कुकुरपोंछी : ई ना  सुधरिहैं
भले आग में ई फतिंगा जरि के मरिहैं
फेनु से ई प्रीत करिहैं : फेनु से उफर परिहैं
देह के छूवलुS त अब जियरा में आवSS |

ए हवा,जनि छुवS तू देह धोती मत हिलावSS |

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