बड़बड़ाने की आदत है न ....इसलिए

शनिवार, 26 दिसंबर 2015

दस का कडुवा तेल
माँगा हरखुआ ने |
“सूंघने को भी नहीं मिलेगा”
-सेठ ने हंसकर कहा |
“सूंघने को नहीं ,सेठ !”
-बोला सोझबक हरखुआ-
“सर में लगाने को
और थोड़ा खाने को
दस का थोड़ा कडुवा तेल
हमको चाहिए था |”
“मार ...भेंचो.. स्साले को”
-बिदक कर बोला सेठ-
“भैंचो ,इत्ती महंगाई में
कैसे मिलेगा थोड़ा भी
दस का कडुवा तेल ?”
- “अरे, सेठ यही बात
थोड़ा इज्जत से समझाता |”
-“भैंचो ...दस का इत्ता ही इज्जत आता |”

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