न जाने अर्थ क्या लगे
उसे रुचे या ना रुचे
खुशामदी के दौर में
अब शब्द कहना भी कठिन है |
पहले प्रयुक्त हो क्रिया
या शुरू में सर्वनाम हो
अनुशासनों के दौर में
अब वाक्य गढ़ना भी कठिन है |
तलवार की झंकार हो
या कोकिला की तान हो
विमूढ़ता के दौर में
अब गीत गुनना भी कठिन है |
ऐश्वर्य का स्पर्श हो
या भूख- डर -संताप हो
निस्पंदता के दौर में
अब संवेदना बचना भी कठिन है |
जय मिले या क्षय मिले
कोई सुने या ना सुने
कोलाहलों के दौर में
अब मौन रहना भी कठिन है |
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