बड़बड़ाने की आदत है न ....इसलिए

शनिवार, 26 दिसंबर 2015

साँप के जीभ लपलपाय त थुराय जास,
आदमी के जीभ पर ना कवनो लगाम बा |
जेकरा जे मन करे उहे चिल्लात रहे ,
सुने वाला के ना कवनो अख्तियार बा |
पोपट , चोपट , घोंघट , बकोटन
सभन के आपन आपन अलगा विचार बा |
रउआ काहे भाव देत बानी ई ससुरन के
राउर बिचार कहाँ परल अँचार बा |
बदनामी के डर ना ई थेंथरन के तनिको बा
एकनि के बदनामियों में छिपल प्रचार बा |

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