बड़बड़ाने की आदत है न ....इसलिए

मंगलवार, 18 अगस्त 2015

जो कुछ बातें सच्ची हैं; वे सारी बातें झूठी हैं
देश भले आजाद हो गया सारी जनता भूखी है|
भूखी जनता नंगी होकर भीषण लूट मचाये है
जिसके हिस्से जो भी आया लूट खसोट के खाए है|
हवा को खाया कुछ लोगों ने ,अब पानी की बारी है
मिट्टी कौन ग्रसेगा इसकी मारामारी जारी है|
कुछ लोगों ने औरत खाया ; बच्चे खाए औरों ने
सरहद पर के फौजी को खाया नरभक्षी सिरमौरों ने|
बड़े घाघ निकले जिन्होंने हड्डी खाया -खून पचाया
जिसके हिस्से इज्जत आई उसको भी धोधोकर खाया |
कुछ ऐसे भी थे जो अपना ही हाड-मांस खा गए
जिनके हिस्से कुछ ना आया वे गोली सल्फास खा गए

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