एक समय छत के ऊपर नेवाड़ के खटिया डसाये हुए
हम गहिरा अंघी में सुतल थे थाकल तनी अलसाये हुए
नगदे चीकन आसमान रहा चान - जोन्हि चमकाए हुए
तनी मधिमें-मद्धिम बेयार बहे गंध चमेली नहाये हुए
तले कहाँ दूनी से बुनी पर गया हम भागे अगुताये हुए
अंघी टूटल से आलगा सगरो बिछौना भींजाए हुए
कोठरी में पहुंचे जइसे ही सुतने का मूड बनाये हुए
तइसे बरखा खत्तम् भs गया हम एतना खिसियाए हुए
कि इनर देव बूझत होइहें केतना हम गरियाये हुए
हम गहिरा अंघी में सुतल थे थाकल तनी अलसाये हुए
नगदे चीकन आसमान रहा चान - जोन्हि चमकाए हुए
तनी मधिमें-मद्धिम बेयार बहे गंध चमेली नहाये हुए
तले कहाँ दूनी से बुनी पर गया हम भागे अगुताये हुए
अंघी टूटल से आलगा सगरो बिछौना भींजाए हुए
कोठरी में पहुंचे जइसे ही सुतने का मूड बनाये हुए
तइसे बरखा खत्तम् भs गया हम एतना खिसियाए हुए
कि इनर देव बूझत होइहें केतना हम गरियाये हुए
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