अहा ! यह अमूल्य जीवन
और इसके -
रत्नो-से भी अधिक कीमती पल !
और , कुछ क्षण के लिए ही सही
मैं हुआ प्रतिबद्ध दृढ़तर
कि सहेज लूँगा मैं पल - पल -
रत्न की ही माफिक !
किन्तु हाय ,
रेत के माफिक बाहर गिरे
ये कीमती पल !
बंद होती मुठ्ठियों से और भी वेगतर !
शेष पल हो गए है
और भी बहुमूल्य अब !!!!
और इसके -
रत्नो-से भी अधिक कीमती पल !
और , कुछ क्षण के लिए ही सही
मैं हुआ प्रतिबद्ध दृढ़तर
कि सहेज लूँगा मैं पल - पल -
रत्न की ही माफिक !
किन्तु हाय ,
रेत के माफिक बाहर गिरे
ये कीमती पल !
बंद होती मुठ्ठियों से और भी वेगतर !
शेष पल हो गए है
और भी बहुमूल्य अब !!!!
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें