बड़बड़ाने की आदत है न ....इसलिए

रविवार, 28 दिसंबर 2014

बस यही दुआ है -
जल उठे सब झालरों की लाईटे-
जो कल लिया था आपने बाज़ार से !
और कमतर ही मिले मिलावटें,
उन लड्डुओं में -
जो मिले थे पास की दुकान से !
और फुस्स से न बजे धम्म से बजे,
वो चाइनीज़ पटाखे-
जो खूब महंगा जानकर आपने लियाथा !
औए सबकुछ ठीक वैसे ही चले,
जैसा की प्लानिंग आपने पहले किया था !
आपको दीपोत्सव की मेरी शुभ कामना है !
बस यही दुआ है !!!!!!

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