बड़बड़ाने की आदत है न ....इसलिए

रविवार, 28 दिसंबर 2014

सच का मुंह बदसूरत क्यूँ है ?
झूठ के मुंह पर मेकअप क्यूँ है ?
झूठ में सच का घालमेल ,
यह इंसानों की फितरत क्यूँ है ?
गदहे जब से राजा बन गए
सारी दुनिया भौचक क्यूँ है ?
कौए राजमहल जा बैठे -
बहुमत इतना घातक क्यूँ है ?
चिल्लाना अब राजधर्म है ,
मौन अभी इतना चुप क्यूँ है ?
एक मनस्वी के सम्मुख
सबकी बुद्धि नतमस्तक क्यूँ है ?
यह किस युग की नीरवता है ,
प्रश्नों की कम ताकत क्यूँ है ?
राम ने शिव धनु तोड़ दिया तो
विश्वामित्र भी गुपचुप क्यूँ है ?

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