बड़बड़ाने की आदत है न ....इसलिए

रविवार, 28 दिसंबर 2014

हमार शिवनारायण भाई -
पूजा पाठ ना जानेले |
लोग कहेला कि उ भगवान के ना मानेले |
दिन में शराब पियेले ; रात में गांजा |
जब दुनू ओराउ , तब भांग के भाँजा |
लोग घिनाला उनका से ;
कगरियाला उनका से |
हमरा त बड़ा पटेला ,नीमन फरियाला उनका से |
ना, ना हमारा में कवनो ऐगुन नईखे |
हम पियक्कड़ ना हईं |
बाकिर हमहीं उनका बकवास के बुझक्कड़ हईं |
हमारा उ काहें भावेले ई कथा से बुझाई रउआ |
उनकर झूठ-साँच सभै फरियाईं रउआ |
बात तेरस के हा ; ओहिदीन शिव जी के पूजा रहे |
शिवनारायण भाई के हाथ में गंगा-जल ,बेलपत्र , आ धतूरा रहे |
हमारा से कहले कि शिव जी उनकर गुरु हईं, आ गुरु-मंतर हईं |
काSहे कि शिव जी उनका नियर पियक्कड़ हईं |
उ कहले कि हम आज शिव जी के पहिले जल चढ़ायेम ;
तबै दू ढकना मुंह में लाएम |
हमनी के दुनू जाना मंदिर में गईनी जा |
भारी अचरज !
शिवलिंग गायब ! खलिहा गड़हा रहे ओहिजा !
ई मत बुझी कि शिवनारायण भाई से शिव जी लुका गईनी |
ना, ना,उहाँमें रतन जड़ल रहे ,
उहाँके इंटरनेशनल मार्किट में बेंचा गईनी |
पंडीजी पूजा करत-करत गज़ब करी देहले |
तेरस के दिनहिं शिव जी के स्मगल करि देहले |
बाकिर शिवनारायण भाई हिमत नाS हारले |
गणेश मंदिर गईले --
जल बेपत्र धतूरा ओहिजा चढवले |
गणेश जी से कहले-‘’आsहो बबुआ !
राउर बाबूजी त बिदेश घूमे गईल बानी |’’
‘’उहाँ के आयीं , त कही देब- काका आ के, चल गईल बानी |
हमरा घरे कुल्हि ढेर काम सरिहारे के बा |
भांग पियेके बा चिलम चढ़ावे के बा |’’
‘’एही से अबहिन जात बानी |
ई जल बेलपत्र राउए के चढ़ा देत बानी |’’
हम उहवा देखनी जे रोज़ पूजा करे वाला--
पत्थर पूजेवाला --
भगवान के बेंचि के खा गईले |
आ नास्तिक शिवनारायण भाई -
शराब पियेवाला --
पथरो के भगवान बना गईले |
बात त ढेर लमहर हो गईल; बाकिर अब बतायीं राउआ |
सही माने में आस्तिक के फरियाई राउआ |

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