बड़बड़ाने की आदत है न ....इसलिए

रविवार, 28 दिसंबर 2014

कबो एकहुँ ना हाथ में आवे
मन चाहो कि सभ मिल जावे
रंग रंग के तितली जइसन लरिकाई के ख्वाब |


जेतना लागत ; ओतने लाभ
ना तनी अधिक ना तनिको घाट
पंसारी के गल्ला जइसन तरुनाई के ख्वाब |



कुछु टूट गईल कुछु चनक गईल
कुछु बेमन से जतन धईल
शीशा जइसन हो जाला बुढ भईला पर ख्वाब |



जवन ख़्वाब शेष रहि जाला
संतति के मन में घुस जाला
देहि भले मर जाओ बाकिर न मुएला ख्वाब |



रंग बिरंगा बाकिर महंगा शीशा जइसन ख्वाब |
जीवन के सुघर फेड़ के बीया जइसन ख़्वाब |

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