बड़बड़ाने की आदत है न ....इसलिए

शनिवार, 20 सितंबर 2014

कि ताकत आजमाया जा रहा है
मुझे गदहा बनाया जा रहा है I

फकत घास है किस्मत में मेरे
मुझे ये भी सिखाया जा रहा है I

अंगूर मेरी नज़रों से हटाकर
उसे खट्टा बताया जा रहा है I
ख़बर है कि मेरे पीठ पीछे
कोई खिचड़ी पकाया जा रहा है I
उसे मालूम है वो पहले कटेगा
जो बकरा ज्यादा खिलाया जा रह है I
वो भी हंस रहा है आज सब पर
जिसकी खिल्ली उड़ाया जा रहा है I
रात होने तो दे उसे सब दिखेगा
जिसे उल्लू बनाया जा रहा है I
कहीं से तर्ज़ कहीं से हर्फ़ लेकर
इस ग़ज़ल को बनाया जा रहा हैI

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