बड़बड़ाने की आदत है न ....इसलिए

शनिवार, 20 सितंबर 2014

 जमाना सिर्फ मेरी बुराईयों पर गौर करता है !
अच्छाई जो भी करता है कोई और करता है !
बहुत नाज़ुक हो गए आजकल रिश्तों के धागे
तुरंत ही टूट जाते है जब भी जोर पड़ता है !
बहुत गुलज़ार थी उनकी हवेली चार बच्चों से
अब सबकी हुयी शादी यहाँ पर कौन रहता है !
जब भी मिले यह शख्श जम कर पीटना इसको
पकाता है बहुत जब फेसबुक पर शेर कहता है !

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