बड़बड़ाने की आदत है न ....इसलिए

बुधवार, 3 सितंबर 2014

चार पैसे हाथ में ला पाये तो तुम आज़ाद हो
कल के लिए दो रोटियां भी बचाये तो तुम आज़ाद हो
देह से पहले तुम्हारे स्वप्न बूढ़े हो गए
उनको मरने से बचा पाये तो तुम आज़ाद हो
रेत बनती जा रही है भाई चारे की जमीन
फूल कोई उसमे खिला पाये तो तुम आज़ाद हो
हर तरफ से लुट रही दौलते -हिन्दोस्तान
एक मुट्ठी तुम उड़ा लए तो तुम आज़ाद हो
हशिए से भी बहुत दूर बैठे हैं कई
हाशिये के भी करीब आये तो तुम आज़ाद हो
आत्महत्या के इरादों ने किया भरी सितम
ज़िंदा अगर खुद को बचा पाये तो तुम आज़ाद हो

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