शहर के एक कोने मेरी एक दुकान थी !
इसकी अपनी उम्दा आन बान शान थी !
न अपना धंधा मंदा था न कोई काम गन्दा था!
बड़ी शोहरत थी मेरी कि मै एक नेक बंदा था !
न दोयम कभी बेंचा न लूटा किसी को !
न ही एक रत्ती कम कभी तौला किसी को !
शहर के लोग मुझसे खुशनुमा व्यवहार रखते थे!
मेरी तारीफ करके मुफ्त में प्रचार करते थे !
इसकी अपनी उम्दा आन बान शान थी !
न अपना धंधा मंदा था न कोई काम गन्दा था!
बड़ी शोहरत थी मेरी कि मै एक नेक बंदा था !
न दोयम कभी बेंचा न लूटा किसी को !
न ही एक रत्ती कम कभी तौला किसी को !
शहर के लोग मुझसे खुशनुमा व्यवहार रखते थे!
मेरी तारीफ करके मुफ्त में प्रचार करते थे !
मेरे बेटे ने संभाली है गद्दी आजकल में !
बड़ा तब्दील अाया है मेरे खुद के चलन में !
अब मै झूठ को भी सच ही कह कर बेंचता हूँ!
जितना झींट सकता हूँ किसी से ;झींटता हूँ !
मेरी इज्जत को बेटे ने सरेआम फींच कर !
बैनर बना कर टांग दी है चौक पर !
इसकी उसकी इज्ज़तों में अब न कोई फर्क है!
साथ वाले बैनरों के एक जैसे हर्फ़ है!
बड़ा तब्दील अाया है मेरे खुद के चलन में !
अब मै झूठ को भी सच ही कह कर बेंचता हूँ!
जितना झींट सकता हूँ किसी से ;झींटता हूँ !
मेरी इज्जत को बेटे ने सरेआम फींच कर !
बैनर बना कर टांग दी है चौक पर !
इसकी उसकी इज्ज़तों में अब न कोई फर्क है!
साथ वाले बैनरों के एक जैसे हर्फ़ है!
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